निषाद समाज के हक में भूमा रैकवार की हुंकार मांझी मछुआ सामाजिक संगठन मैहर ने मनाया दूसरा स्थापना दिवस

निषादवंशी मांझी मछुआ केवट सिगरहा सामाजिक संगठन मैहर ने अपना दूसरा स्थापना दिवस मनाया शहर के पटेल भवन में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें मुख्य अतिथि मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी और जलवंशीय मांझी समाज मध्यप्रदेश अध्यक्ष श्रीमती भूमा रैकवार, और मुख्य विशिष्ट अतिथि श्रीमती मीना रैकवार उपस्थित रही।आयोजित स्थापना दिवस के कार्यक्रम में नशा मुक्ति और शिक्षा पर विशेष बल दिया गया। जैसे ही भूमा रैकवार का उद्बोधन जय निषाद राज के जयकारों से शुरू हुआ निषादवंशियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और जय निषाद राज के जयकारों से पूरा सभागार गूंज उठा। संगठन के दूसरे स्थापना दिवस के पर ही हजारों की तादाद में निषाद समाज के लोग मौजूद रहे।
मैहर शहर की सभागार में आयोजित निषादवंशी मांझी समाज को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती भूमा रैकवार ने कहा हमें बुरा लगता है जब हमारे समाज के मजदूर भाई-बहन सक्षम लोगों के काम कम पैसा लेकर कर देते हैं लेकिन जब समाज के लिए काम करने की बारी आएगी तो वह अधिक दाम बढ़ाकर मुंह मांगे पैसे मांगते हैं हमें चाहिए कि समाज के सक्षम वर्ग के लोग समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को ही काम दें और समाज के लोगों का ही सहयोग करें जिस दिन हमारे अंदर यह आर्थिक एकता आ गई तो स्वाभाविक है हमारे समाज की आर्थिक स्थिति में सुधार होना शुरू हो जाएगा और रोजगार भी बढ़ेगा आज हमें नदी तालाब क्यों नहीं मिल रहे हैं क्योंकि हम खुद नहीं ले पाए क्योंकि हमारे समाज की समितियां के पास पर्याप्त धन ही नहीं है कि हम तालाब नदी के ठेके ले पाए मजबूरी में दूसरे समाज की समितियां को काम देना पड़ रहा है और हमारे समाज के लोगों से ही मजदूरी कर रहा है हम मजदूर के मजदूर ही बने हैं।
कार्यक्रम में मुख्य विशिष्ट अतिथि श्रीमती मीना रैकवार ने कहा समाज के जो युवा पढ़-लिखकर ऊँचे पदों पर पहुँच रहे हैं, उन्हें अपने पीछे आ रहे भाइयों का मार्गदर्शन करना चाहिए।आपसी संवाद के माध्यम से गाँवों और शहरों में नियमित रूप से सामाजिक गोष्ठियों का आयोजन होना चाहिए, जहाँ ऊंच-नीच के भेदभाव को भुलाकर केवल ‘मांझी’ पहचान को प्राथमिकता दी जाए। ताकि हमारा मांझी समाज भी आगे की पंक्ति में आगे आ सके।
संगठन के अध्यक्ष शिव प्रताप सिगरहा ने कहा नशा केवल एक व्यक्ति मात्र की नहीं बल्कि हमारे पूरे निषादवंशी समाज को खोखला कर रहा है हमारे मन की समाज के युवा थकान दूर करने और तनाव कम करने के नाम पर नशे की गिरफ्त में फंस गए हैं नशे के आदि में युवाओं को चाहिए कि वे दृढ़ संकल्प ले मुझे अपनी खुशियों के लिए जीना है। नशे की लत छुड़ाने के लिए परिवार का भावनात्मक समर्थन की भी आवश्यकता है इसलिए इस मंच से हम खुलकर इस पर बात कर रहे हैं कि हमारे सभी भाइयों को उन युवाओं को बुजुर्गों को इस नशे की लत को छोड़ना होगा तभी हमारे समाज का सर्वांगीण विकास होगा तभी हम बचत कर पाएंगे सही दिशा में आगे बढ़ पाएंगे इसके लिए आप योग ध्यान भी कर सकते हैं नशे की लत को कम करने के लिए योग ध्यान मददगार साबित होता है।
सचिव सुरजीत सिगरहा ने कहा- हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा । बड़े नेताओं की रैली और बुलावे पर हमारे समाज के लोग चले जाते हैं लेकिन हमारे अपने समाज के लिए समय नहीं देते। उदाहरण विधालय से दूर बच्चों को ले जाते हैं।
जय बिहारी केवट ने आयोजित कार्यक्रम में कहा मुझे बोलना नही आता मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं फिर भी मैं अपने समाज के लिए इस मंच पर आया हूं हमारी समाज पीड़ित हैं कुछ असहाय है हमें आत्मनिर्भर बनना होगा युवाओं और बुजुर्ग को एकजुट होकर समाज हित में कार्य करना होगा युवाओं का कंधा हों बुजुर्ग की आंखें हों।तभी हम अपने हक की लड़ाई लड़ पाएंगे।
श्रीमती लक्ष्मी बर्मन ने समाज को बचत करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा- छोटी छोटी बचत करने पर जोर दिया, स्व-सहायता समूह से जुड़े, आपसी संवाद कर समस्या का समाधान करना है। हमें थोड़े थोड़े पैसे बचाने की आदत डालनी होगी और फिजूलखर्ची से भी बचना होगा ताकि बुरे समय में हम कर्ज के बोझ तले ना दब सके हमें अपनी जरूरतों को सीमित करना होगा।
वर्षा केवट – समाज का विचार व्यवहार ऐसा हो जो सबको साथ जोड़े सामूहिक अनुशासन पर विशेष बल देना आवश्यक है।
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Prabhat umang धीवर समुदाय के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लेखक हैं उन्हें लेखन का एक लंबा अनुभव है प्रभात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दैनिक स्वदेश , दैनिक स्वदेश ज्योति और नव स्वदेश समाचार पत्र में सहायक लेखक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं प्रभात उमंग एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं उन्होंने धीवर समुदाय के समाज हित में सेवा कार्य किया है समाज कार्य के क्षेत्र का उन्हें एक अच्छा अनुभव है prabhat umang एक शोधकर्ता भी है