जानिए मध्य प्रदेश में माझी मझवार ढीमर निषाद समाज को संगठित करने के कारगर उपाय

माझी मझवार केवट और ढीमर समुदाय को संगठित करना न केवल सामाजिक एकता के लिए जरूरी है बल्कि आर्थिक अधिकारों के लिए भी जरूरी है यदि सामाजिक और आर्थिक एकता समाज में आ जाती है तो राजनीतिक एकता भी स्वत: ही आ जाएगी किसी भी समुदाय को एकजुट करने के लिए एक सांझा विजन और जमीनी जुड़ाव की आवश्यकता होती है।
विषय के लाभ बताए – मध्य प्रदेश में माझी मझवार केवट ढीमर जाति की उपजातियां बहुत सारी हैं जिम मल्लाह ,भोई सिंगरहा ,बिन्द ,कहार, कश्यप ,बाथम आदि समस्त शामिल है। इन सभी जातियों को मध्य प्रदेश में एक करने के लिए समाज के विभिन्न कार्यकर्ता संगठन और राजनेता प्रयासरत तो हैं लेकिन मूल बात आरक्षण के मुद्दे और सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त करते सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय हैं लेकिन कहीं भी समाज हित के अपने एक स्पष्ट प्रभावी विषय और उसे विषय के लाभ आमजन के बीच नहीं रख पा रहे हैं जो सबसे ज्यादा आवश्यक है यदि मांझी समाज के सबसे अधिक संवेदनशील विषय पर बात की जा रही है तो उसे आरक्षण से मिलने वाले लाभों को क्रमवार स्पष्ट रूप से पारदर्शिता के साथ बताएं हर वर्ष समय बदलता है और समाज का प्रतीक व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरत को पूरा करने में व्यस्त हो जाता है क्योंकि उसे अपने परिवार का भरण पोषण करना है ऐसे में आप बार-बार लाभ को बताएं उसके उपायों पर काम करें।
राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता में थोड़ा अंतर है -लेकिन समाज कार्य और राजनीति दोनों एक दूसरे के पूरक हैं राजनीति के बिना समाज कार्य करना संभव नहीं है क्योंकि राजनीति और समाज कार्य वास्तव में एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जहां समाज कार्य जमीनी स्तर पर लोगों के दुखों को दूर करने और उन्हें सशक्त बनाने का कार्य करता है वही राजनीति उन नीतियों का निर्माण करती है। जमीनी स्तर पर उतरकर सेवा को समर्पित एक मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री धारी सामाजिक कार्यकर्ता समाज का इंजीनियर होता है जो समाज से जमीनी स्तर पर जुड़कर लोगों के दुखों को दूर करने का प्रयास करता है और उनकी समस्याओं का समाधान करता है। वही राजनेता वह व्यक्ति होता है जो सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होकर नीति निर्धारण, शासन चलाने या सत्ता के माध्यम से समाज की समस्याओं को हल करने का कार्य करता है।
भेदभाव को मिटाए- केवट माझी मझवार और ढीमर जाति की उपजातियों के बीच अपने भेदभाव को मिटाए उन्हें सरकारी दस्तावेजों के साथ विश्वनीय तरीके से जानकारी दें ताकि उन्हें इस बात का ज्ञान हो सके कि हमारी जाति की उपजातियां कौन-कौन सी हैं और जाति कौन-कौन सी हैं आज आधुनिक युग का दौर है ज्यादातर युवा पढ़े लिखे हैं और सोशल मीडिया पारदर्शिता के साथ सच्चाइयों और भरोसेमंद जानकारी को उजागर करने का सशक्त माध्यम है आप भेदभाव मिटाने के लिए भरोसेमंद तकनीक और विधियो का प्रयोग करें और अपनी बातों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।
समाज की जिस समस्या का समाधान करना है इस विशेषज्ञ के पास जाएं – वर्तमान समय में समाज की बहुत सारी संगठन बने हुए हैं जो माझी ,मझवार,केवट, ढीमर को संगठित करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं लेकिन जागरूकता के अभाव और कुछ भेदभाव के कारण संगठित नहीं हो पा रहे हैं समाज की सभी उपजातियां ने अपने-अपने संगठन बनाकर रजिस्टर्ड करा लिए हैं लेकिन सभी एक उद्देश्य पर काम कर रहे हैं एक ही दिशा में काम कर रहे हैं लेकिन फिर भी संगठन के संचालन में कुछ भेदभाव, कुछ असंतोष के कारण, और कुछ प्रयासों की कमी के कारण संचालन में बड़ी-बड़ी समस्याओं का सामना भी करना पड़ जाता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए हम निम्नलिखित उपायों का उपयोग कर सकते हैं।
सभी सामाजिक संगठन अलग-अलग क्षेत्र में अपनी अपनी विशेषज्ञ रखें- उदाहरण एक संगठन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर सकता है और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता रखकर जनहित में कार्य कर सकता है शासकीय प्रोजेक्ट भी ले सकता है क्योंकि एक सामाजिक संस्था सरकार और आम जनता के बीच सेतु का कार्य करती है। तो कोई दूसरा संगठन शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर सकता है वह शासकीय शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़ सकता है ऐसा ही तीसरा संगठन रजिस्टर्ड है तो वह विधिक सहायता क्षेत्र में कार्य कर सकता है इसके लिए समाज के वकीलों और अधिवक्ताओं की सेवा ले सकता है और शासकीय विधिक सहायता केंद्र से जुड़ सकता है यदि चौथा संगठन स्वच्छता या पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है तो वह संबंधित शासकीय विभाग से जुड़कर प्रोजेक्ट लेकर भी कार्य कर सकता है जल प्रबंधन और मछली से संबंधित प्रोजेक्ट भी लिए जा सकते हैं और उसे पर कार्य किया जा सकते हैं इस तरह से अलग-अलग क्षेत्र में सभी रजिस्टर्ड संगठन अपनी विशेषज्ञ के हिसाब से सेवा कार्य कर सकते हैं यह सभी प्रकार की सेवाएं अलग-अलग हैं और सभी सेवाएं हमारे समाज के लिए बहुत आवश्यक है। समाज को संगठित करने और आर्थिक रूप से मजबूत करने में अपना बड़ा योगदान दे सकते हैं।
समाचार का प्रभावी ढंग से प्रस्तुतीकरण-वर्तमान समय में जितने भी माझी समाज के संगठन हैं वह समाचार को प्रभावी ढंग से नहीं बनाते हैं उदाहरण माझी समाज का आदर्श विभाग परिचय सम्मेलन आयोजित है उसमें 101 जोड़े का विवाह हुआ अतिथि का नाम और समाज के 200-500 लोगों के नाम दे दिए जाते हैं मूल बात पर फोकस नहीं करते हैं विस्तार से जानकारी देना आवश्यक है बड़ी समाचार पत्रों के पास यदि जगह सीमित होती है तो छोटे समाचार पत्र प्रभावी लेखो को विस्तार से लिखते हैं लेकिन माझी समाज के संगठन पूरी बात साझा नहीं करते आपको अपने संगठन का समाचार नए-नए तरीकों से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए।
एक चेहरे पर भरोसा ना होना –माझी समाज के नए- नए संगठनों का उदय मध्य प्रदेश में होता है बनते हैं और कुछ समय के बाद निराशा के अंधकार में डूब कर बंद हो जाते हैं जिसका मूल कारण है एक चेहरे पर भरोसा ना होना जब तक संगठन (एनजीओ )के प्रमुख पर बाकी सभी सदस्यों का भरोसा नहीं होगा तब तक संगठन का संचालन करने में कठिनाइयों का सामना करना होता है आप संगठन बनाने से पहले योग्य और अनुभवी और भरोसेमंद व्यक्तियों का चुनाव करें यदि कमेटी के किसी व्यक्ति में नेतृत्व की क्षमता है तो उसे ही प्रबंधक/अध्यक्ष रुचि व्यवहार मिलनसार व्यक्तित्व शिक्षा और योग्यता के आधार पर चुनना चाहिए यदि किसी व्यक्ति को अकाउंट का अच्छा अनुभव है उसकी रुचि है तो उसे ही कोषाध्यक्ष बनाना चाहिए भले ही आपके संगठन में बायलॉज में 10 उद्देश्य लिखे हैं आपको एक ही उद्देश्य पर कार्य करना चाहिए ताकि संस्था की विशेषज्ञता साबित हो सके।
संस्था के नाम पर भरोसा होना चाहिए – वर्तमान समय में जितने भी संगठन है वह अपने ही चुने हुए चेहरे पर भरोसा नहीं करते हैं संस्था के बाकी सदस्यों में भी अविश्वास देखा जाता है इसका मुख्य कारण है संगठन तो सामाजिक है लेकिन उसे राजनीतिक विधि से चलाया जाता है संगठन में अध्यक्ष और बाकी पदाधिकारी की फोटो लगाकर प्रचार प्रसार होता है जिससे बाकी सदस्य गण असंतुष्ट हो जाते हैं आपको केवल अपने संगठन का नाम का ही बैनर लगाना चाहिए उदाहरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ध्वज को गुरु मानता है संघ में कोई एक व्यक्ति प्रमुख नहीं होता एक कमेटी संचालन करती है भले ही सर संघचालक जी हैं और पूरा संगठन अनुशासन से चलता है इस प्रकार हमारे समाज के संगठन को अपने संगठन के नाम को ही सब कुछ मानना चाहिए और चुने हुए प्रमुख पर भरोसा करके ही आगे बढ़ना चाहिए।
नोट – यह लेख लेखक के अनुभवों पर आधारित है आपको हमारे यह लिख कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं यदि आपको हमारा यह लेख उपयोगी लगा हो तो लाइक शेयर करना ना भूले मध्य प्रदेश के माझी निषाद समाज से जुड़ी सभी अपडेट्स पाने के लिए बने रहिए आपके अपने न्यूज पोर्टल प्रभात की कलम पर जहां आपको मिलती है माझी निषाद समाज की सभी खबरें सबसे तेज। यदि आप हमें किसी प्रकार का सुझाव देना चाहते हैं या फिर आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं तो आप हमें ईमेल prabhatkikalam@gmail.com, पर भेज सकते हैं।
Prabhat umang धीवर समुदाय के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लेखक हैं उन्हें लेखन का एक लंबा अनुभव है प्रभात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दैनिक स्वदेश , दैनिक स्वदेश ज्योति और नव स्वदेश समाचार पत्र में सहायक लेखक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं प्रभात उमंग एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं उन्होंने धीवर समुदाय के समाज हित में सेवा कार्य किया है समाज कार्य के क्षेत्र का उन्हें एक अच्छा अनुभव है prabhat umang एक शोधकर्ता भी है