मध्यप्रदेश के माझी समाज को संवैधानिक अधिकार दिलाने की दिशा में बड़ी पहल: सांसद गणेश सिंह ने दिल्ली में उठाई मांग

नई दिल्ली/सतना :विंध्य क्षेत्र के वंचित वर्गों को उनके उचित संवैधानिक अधिकार दिलाने के संकल्प के साथ सतना सांसद गणेश सिंह ने आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। सांसद सिंह ने भारत सरकार के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त श्री मृत्युञ्जय कुमार नारायण जी से सौजन्य भेंट कर विंध्य क्षेत्र के माझी (ढीमर केवट, मल्लाह, भोई, ) समाज की दशकों पुरानी मांगों को पुरजोर तरीके से केंद्र सरकार के समक्ष रखा।
संवैधानिक न्याय की ओर बढ़ते कदम
इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र माछी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में शामिल करने और उन्हें संवैधानिक अधिकार प्रदान करना था। सांसद गणेश सिंह ने केवल मौखिक चर्चा ही नहीं की, बल्कि समाज के इतिहास, उनकी सामाजिक स्थिति और पात्रता को सिद्ध करने वाले ठोस तथ्य और ऐतिहासिक दस्तावेज भी आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए।
तथ्यों और दस्तावेजों पर गंभीर मंथन
बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों पर जनगणना आयुक्त ने गंभीरता दिखाते हुए विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया। सांसद सिंह ने आग्रह किया कि समाज की भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके साथ न्याय किया जाए।
सांसद गणेश सिंह ने इस चर्चा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:
ऐतिहासिक साक्ष्य: मध्य प्रदेश में माझी और उनकी उपजातियों की पारंपरिक जीवनशैली।
न्यायोचित समाधान: लंबित पड़े तकनीकी मामलों का त्वरित निराकरण।
सर्वांगीण विकास: आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभों के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में वापसी।
संकल्पित नेतृत्व, सशक्त समाज मुलाकात के पश्चात सांसद गणेश सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा: ”समाज के अधिकारों की प्राप्ति एवं उनके सर्वांगीण विकास के लिए मैं निरंतर प्रयासरत हूँ। माछी समाज का संघर्ष मेरा अपना संघर्ष है और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, यह प्रयास जारी रहेंगे।”
इससे पहले सतना सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा सत्र के दौरान माझी (ढीमर केवट, मल्लाह, भोई, )को आरक्षण की मांग सदन में रख चुके हैं यह पहला अवसर नहीं है जब सांसद गणेश सिंह ने इस वंचित समाज की आवाज उठाई हो। पहले भी उन्होंने लोकसभा के सत्र के दौरान सदन में शून्यकाल या नियम 377 के माध्यम से माझी (ढीमर, केवट, मल्लाह, भोई) समाज के आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से रखा था। सदन में दी गई उनकी दलीलों का ही परिणाम है कि आज मामला भारत सरकार के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के स्तर पर “तथ्यों के परीक्षण” तक पहुँचा है। सांसद की यह निरंतरता दर्शाती है कि वे केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज को उनका हक दिलाने के लिए विधायी और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय हैं।
ऐतिहासिक महत्व ऐतिहासिक साक्षी मौजूद हैं निषाद ढीमर मल्लाह केवट समाज का राज सदियों से जल जंगल जमीन पर राज रहा है निषाद जाति को सभी जातियों का पिता कहा जाता है मानव सभ्यता के आरंभ से ही निषाद जाति का उदय हो चुका था जहां-जहां जल है वहां वहां निषाद है ढीमर है केवट है मल्लाह है और प्राचीन काल से ही जली खेती करने के लिए प्रचलित है नाव चलाने के साथ-साथ जल से जुड़ी सभी प्रकार की खेती यह समाज सदियों से करता आ रहा है।
दस्तावेज का महत्व – राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत सरकार द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सबसे पहले ढीमर महासभा मध्य प्रदेश द्वारा एक दो दिवसीय महासम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें प्रदेश के सभी ढीमर समाज के लोग एकत्रित हुए थे और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से मुलाकात करके आरक्षण की मांग की गई थी यह पत्र में स्पष्ट रूप से लिखित है और साक्ष्य प्रमाणित है ।
गौरतलब है कि नरसिंहपुर शहर के जाने-माने पत्रकार अमर नोरिया द्वारा राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत सरकार द्वारा प्राप्त दस्तावेज पत्र जिसका पत्र क्रमांक 190 दिनांक 6 दिसंबर 1949 है ढीमर महासभा जबलपुर मध्यप्रदेश द्वारा माननीय डॉ भीमराव अम्बेडकर जी से माझी,ढीमर,मझवार, मल्लाह भोई,कहार आदि जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए 12.10.49 को इस समाज के आधे लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल माननीय डॉ. अम्बेडकर से मिला था। वर्तमान समय में लोकसभा में माननीय लोकसभा सांसद डॉ विनोद बिन्द ,लक्ष्मी कांत पप्पू निषाद , गणेश सिंह, यह प्रस्ताव रखा है यह एक ऐतिहासिक सामाजिक मांग है धीवर समाज और उससे जुड़े अन्य समुदाय (मल्लाह, केवट, कश्यप, धीमर आदि) आर्थिक और व्यापारिक रूप से निरंतर पिछड़ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी इन समुदायों की प्रगति आशातीत नहीं रही है।”यह जातियाँ भारत की श्रम संस्कृति और परंपरा का जीवित प्रतीक हैं।
क्या होगा प्रभाव?
विंध्य क्षेत्र के ढीमर केवट, मल्लाह, भोई समाज के लिए यह मुलाकात एक नई उम्मीद लेकर आई है। यदि जनगणना आयुक्त के स्तर पर इन दस्तावेजों का सकारात्मक परीक्षण होता है, तो आने वाले समय में इस समाज के हजारों परिवारों के लिए शिक्षा, नौकरी और सामाजिक सुरक्षा के नए द्वार खुल सकते हैं।
नोट – आपको क्या लगता माझी को आरक्षण मिलेगा कमेंट करके जरूर बतायें यदि आपको हमारा यह लेख उपयोगी लगा हो तो लाइक शेयर करना ना भूले निषाद माझी ढीमर समाज के आरक्षण से जुड़ी सभी अपडेट्स पाने के लिए बने रहिए आपके अपने न्यूज पोर्टल प्रभात की कलम पर। यदि आप हमें किसी प्रकार का सुझाव देना चाहते हैं या फिर आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं तो आप हमें ईमेल prabhatkikalam@gmail.com पर भेज सकते हैं
Prabhat umang निषादवंश के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लेखक हैं उन्हें लेखन का एक लंबा अनुभव है वह एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं उन्होंने निषादवंश के समाज हित में सेवा कार्य किया है समाज कार्य के क्षेत्र का उन्हें एक अच्छा अनुभव है prabhat umang एक शोधकर्ता भी है