जनगणना 2026 माझी समाज के लिए अपनी पहचान और अधिकार दर्ज करने का स्वर्णिम अवसर

साल 2026 की जनगणना न केवल देश के लिए बल्कि विशेष रूप से ढीमर मल्लाह केवट भोई केवट (माझी) के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है 1931 के बाद यह पहली बार है जब भारत सरकार आधिकारिक तौर पर जाति आधारित डाटा (caste Enumeration)एकत्रित कर रही है।
यह समय क्यों महत्वपूर्ण है
लगभग 35 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत में एक ऐसी जनगणना हो रही है जहां आपकी जाति और सामाजिक आर्थिक स्थिति का सटीक विवरण दर्ज किया जाएगा यह माझी, ढीमर, मल्लाह , भोई,केवट , मझवार, कहार,बाथम जातियां की सभी उपजातियां के लिए भी एक सुनहरा अवसर है 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका मकान सूचीकरण फेस 1 और फरवरी 2027 में होने वाली जनसंख्या गणना फेस 2 माझी समुदाय के भविष्य की नई पटकथा लिखेंगे।
माझी समुदाय के लिए सटीक जानकारी की अहमियत
माझी समुदाय समाज का एक गौरवशाली इतिहास रहा है लेकिन सटीक आंकड़ों के अभाव में अक्सर सरकारी योजनाओं का लाभ समुदाय के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। इस जनगणना में भाग लेना इसलिए जरूरी है इसे अपने में लिखित बिंदुओं के द्वारा समझ सकते हैं।
आरक्षण और अधिकार- मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में माझी मझवार, ढीमर , मल्लाह ,केवट ,कहार ,भोई समुदाय को मिलने वाली सुविधाओं और पहचान को मजबूती देने के लिए सटीक संख्या का होना अनिवार्य है।
बजट और विकास -सरकारी किसी भी समाज के उत्थान के लिए फंड का आवंटन उसकी आबादी के आधार पर करती हैं यदि हम अपनी सही जानकारी दर्ज नहीं करेंगे तो हमारे विकास के लिए मिलने वाला बजट भी सीमित रह जाएगा।
सामाजिक पहचान- माझी मझवार, ढीमर , मल्लाह ,केवट ,कहार ,भोई समुदाय से जुड़ी कई उपजातियां और क्षेत्रीय विविधताओं को एक सूत्र में पिरोने और अपनी विशिष्ट पहचान को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का यह सबसे बड़ा मौका है जिसे हाथ से न जाने दें यदि आपने अपने रिकॉर्ड में सही-सही जानकारी एक साथ मांझी ढीमर मल्लाह केवट के हिसाब से चयन किया तो निश्चित ही हमें आरक्षण मिल सकता है हमारी सामाजिक पहचान और सामाजिक एकता भी हमारी ताकत बनेगी।
जब भी आप जनगणना का ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे तो आप तीन बिंदु दिए गए हैं
1.अनुसूचित जाति
2.अनुसूचित जनजाति
3. अन्य
सभी समाज के लोगों को दूसरे नंबर का अनुसूचित जनजाति वाला बिंदु का चयन करना है और अपनी उपजाति ना लिखकर नाम के साथ अपनी मूल जाति ही लिखें।
माझी मझवार, ढीमर , मल्लाह ,केवट ,कहार ,भोई समुदाय
समाज के लोग डरे नहीं- अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आपके पास तो पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र है या आपके किसी अन्य दस्तावेज में आपकी मूल जाति नहीं लिखी है उदाहरण के तौर पर मैं अपना नाम प्रभात बर्मन लिखता हूं लेकिन मेरी मूल जाति जाति प्रमाण पत्र में ढीमर लिखी हुई है तों जनगणना का फॉर्म भरते समय मैं अपना नाम प्रभात ढीमर ही दर्ज कराया है और अनुसूचित जनजाति दूसरे नंबर पर है उसका चयन किया है दो बातों का हमें विशेष ध्यान रखना है। अभी आप अपनी मूल जाति का चयन करते हैं तो इससे आपके किसी भी दस्तावेज में कभी भी कहीं भी कोई समस्या नहीं आने वाली है जैसे मेरे सभी पूर्वजों के दस्तावेज में ढीमर लिखा हुआ है इस हिसाब से हम किसी प्रकार की गलत जानकारी नहीं दे रहे हैं।
जनगणना अधिकारी के प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार दें
1949 और 1950 के जो दस्तावेज हमारे समाज के लोगों के पास उपलब्ध हैं हमने इसलिए के साथ आपको सबमिट करें हैं इसमें हमारी समाज को अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित किया गया है इसलिए कोई भी अधिकारी आपसे यह प्रश्न नहीं करेगा यदि करता है तो आप इन दस्तावेजों का हवाला दें सकते। के साथ ही माझी जनजाति संघर्ष समिति भोपाल मध्य प्रदेश के एक दल ने महामहिम राज्यपाल से मुलाकात कर माझी मझवार, ढीमर , मल्लाह ,केवट ,कहार ,भोई समुदाय को आरक्षण विषय पर चर्चा की है और यह मूल दस्तावेज हमारे समाज के जो है जिसमें आरक्षण हमें मिला हुआ है वह महामहिम राज्यपाल को दिया गया है।
लोकसभा में माझी आरक्षण की मांग की जा रही है
मध्य प्रदेश सतना के सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा में माझी मझवार, ढीमर , मल्लाह ,केवट ,कहार ,भोई समुदाय मांग को रखा है तो आपके यहां पर डरने की जरूरत नहीं है इन तथ्यों को आप अधिकारियों के सामने रख सकते हैं और बिना किसी भाई और डर के स्वतंत्र रूप से आप यह फॉर्म भरे।
Prabhat umang निषादवंश के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लेखक हैं उन्हें लेखन का एक लंबा अनुभव है वह एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं उन्होंने निषादवंश के समाज हित में सेवा कार्य किया है समाज कार्य के क्षेत्र का उन्हें एक अच्छा अनुभव है prabhat umang एक शोधकर्ता भी है