बर्मन कौन सी जाति में आते हैं? जानिए अपनी असली पहचान और अधिकार

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बर्मन कौन सी जाति में आते हैं? जानिए अपनी असली पहचान और अधिकार

 

 

Burman Kaun Si Jati Me Aate Hai
Burman Kaun Si Jati Me Aate Hai

 

 

विशेष अपडेट जून 2026

बर्मन (Burman) कोई एक अकेली जाति नहीं है बल्कि एक सरनेम (उपनाम)है जो भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग जातियों और श्रेणियों (Categories) में आता है।

 

 

हिन्दू धर्म में बर्मन जाति या धीवर/ढीमर समाज के लोग नाव चलाने वाले , जलीय खेती करने वाले महर्षि कालू धीवर/ ढीमर के वंशज माने जाते हैं  ढीमर /धीवर  रामायण काल से भी पहले से पृथ्वी पर मौजूद हैं ढीमर/धीवर (बर्मन) जाति का गौत्र कश्यप है मध्यप्रदेश में बर्मन जाति के लोगों का मुख्य कार्य पानी भरना, सूखे के समय पानी खोज कर सभी लोगों  की प्यास बुझाने का कार्य ढीमर समाज करना रहा है ,नाव  चलाना, मछली पालन और मछली बेचना ढीमर बर्मन का कार्य है । बर्मन समाज की उपजातियां मल्लाह, केवट,निषाद, कहार,कछार, सौंधिया, कश्यप, मल्लाह, सिंगरहा, बाथम, आदि मानी जाती है आदि है।

 

मुख्य बात:- मध्य प्रदेश और मध्य भारत के संदर्भ में बर्मन उपनाम मुख्य रूप से धीवर/ ढीमर समाज के लोग लिखते हैं। यह समाज मध्य प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची में आता है।

 

बर्मन (धीवर/ढीमर) समाज का इतिहास और संवैधानिक अधिकार

मूल काम और इतिहास:-ऐतिहासिक रूप से यह समाज जल नदियों और प्रकृति से गहराई से जुड़ा रहा है। मछली संख्या पालन, नौका संचालन और जल प्रबंधन इनका मुख्य पारंपरिक व्यवसाय रहा है।

 

 

 

मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मंत्रालय भोपाल 2014 के अनुसार -ढीमर /धीवर जिनका मुख्य कार्य मछली पकड़ना, पालकी ढोना, सिंघाड़ा च कमल गट्टा उगाना, पानी भरना, नाव चलाना है ।

 

 

 

Burman Kaun Si Jati Me Aate Hai
यह साल 2014 का अखबार मध्यप्रदेश में बर्मन निषाद मांझी समाज

 

 

वैदिक ग्रंथों और संहिताओं में धीवर/ढीमर समाज का गौरवशाली इतिहास

 

​भारत का इतिहास अत्यंत समृद्ध और प्राचीन है, और इस इतिहास के ताने-बाने में धीवर / ढीमर समाज की जड़ें बेहद गहरी हैं। इस समाज की प्राचीनता और ऐतिहासिकता का प्रमाण भारत के सबसे आदिम और प्रामाणिक लिखित दस्तावेजों में मिलता है।

 

ऐतिहासिक शोध और प्रमाण
​भारत के सुप्रसिद्ध इतिहासकारों और विद्वानों ने अपने गहन शोध में इस समाज के गौरवशाली अतीत को रेखांकित किया है:

 

​डॉ. पी. वी. काणे (पांडुरंग वामन काणे): महान इतिहासकार और ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ के लेखक डॉ. काणे के शोध इस समाज की प्राचीनता की पुष्टि करते हैं।

 

 

रांगेय राघव: प्रसिद्ध लेखक और इतिहासकार रांगेय राघव ने अपनी पुस्तक ‘प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास’ में इस समाज के ऐतिहासिक महत्व को प्रमुखता से दर्शाया है।

 

ऋग्वेद और यजुर्वेद में उल्लेख
​वैदिक काल के उत्तरार्ध और विभिन्न संहिताओं में इस समाज का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और आदरणीय रहा है:
​ससम्मान उल्लेख: ऋग्वेद और यजुर्वेद जैसे पवित्र ग्रंथों में धीवर / ढीमर, कैवर्त और दास जैसे शब्दों का स्पष्ट और अत्यंत ससम्मान उल्लेख मिलता है।

 

 

सशक्त पहचान: इन ग्रंथों में इन्हें केवल एक समुदाय के रूप में ही नहीं, बल्कि नदियों और जल स्रोतों के किनारे रहने वाली एक मजबूत, आत्मनिर्भर, साहसी और कुशल कौम के रूप में रेखांकित किया गया है।

 

 

 

All India Dhiwar Mahasabha jabalpur 1949 – धीवर/ढीमर समाज का मध्य प्रदेश में सबसे पहला संगठन ऑल इंडिया धीवर महासभा जबलपुर 1949 है जो पूरे भारत के ढीमर धीवर समाज का नेतृत्व करता था जिसका मुख्यालय जबलपुर मध्यप्रदेश में था इस महासभा के संस्थापक परसराम ढीमर थे। इस संगठन के होने के ऐतिहासिक प्रमाण भी है।

 

 

बर्मन जाति या धीवर/ ढीमर समाज का मुख्य भोजन गेहूं दाल चावल तिली सरसों है प्रारंभ प्राचीन समय से ही ज्यादातर इस समुदाय के लोग मछली पालन और मछली का व्यापार करते हैं और जिनके पूर्वज गंगा तट पर उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद वनारस में रहते हैं आज के आधुनिक युग में ढीमर /धीवर जाति के लोग हर क्षेत्र मे अपना हुनर कौशल दिखा रहे हैं आज हर प्रकार के व्यापारी भी है शासकीय सेवक भी है हिंदी सिने जगत में भी है राजनीतिक जगत में भी समाज के लोग अपनी प्रतिभा के दम पर स्थापित है उन्नत दिशाओं में कदम भी बढ़ा रहे हैं। आज समाज के युवा वर्ग शिक्षित है और शिक्षा की क्षेत्र में उन्नति भी कर रहे हैं आज ढीमर समाज के अनेको संगठन है जो पूरे भारतवर्ष में है समाज के हित में लगातार कार्य कर रहे हैं केरल और छत्तीसगढ़ में धीवर/ढीमर महासभा है जो ढीमर समुदाय के सबसे बड़े संगठन है ।

 

FAQ.

 

Q1. मध्य प्रदेश में बर्मन जाति किस कैटेगरी में आती है?
उत्तर: मध्य प्रदेश की राज्य सरकार की आरक्षण सूची के अनुसार, बर्मन (ढीमर/धीवर) जाति OBC (Other Backward Classes) यानी अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आती है।

 

Q2. क्या बर्मन और माझी एक ही हैं?
​उत्तर: नहीं , तकनीकी और प्रशासनिक रूप से दोनों अलग-अलग हैं  बर्मन (ढीमर/धीवर) समाज अपनी एक स्वतंत्र ऐतिहासिक पहचान रखता है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार ढीमर एक अलग स्वतंत्र जाति है और मांझी एक अलग जाति है ढीमर पिछड़ा वर्ग में आती है माझी अनुसूचित जनजाति में आती है।

 

 

Q3. क्या पश्चिम बंगाल के बर्मन और मध्य प्रदेश के बर्मन एक हैं?
उत्तर: नहीं, दोनों का इतिहास और भौगोलिक पृष्ठभूमि अलग है। पश्चिम बंगाल में बर्मन उपनाम लिखने वाले अधिकतर लोग राजबंशी समुदाय से आते हैं जो वहां SC (अनुसूचित जाति) वर्ग में शामिल हैं, जबकि मध्य भारत में यह OBC वर्ग में आते हैं।

 

 

नोट – आपको हमारा यह लेख कैसा लगा कमेंट करके जरूर बतायें यदि आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं तो prabhatkikalam@gmail.com कर सकते हैं आपको हमारा यह लेख अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों परिवार और परिचितों में शेयर करें ढीमर /धीवर समाज की जानकारियों और खबरों के लिए बने रहिए आपकी अपनी वेबसाइट प्रभात की कलम Prabhat ki Kalam के साथ जहां आपको सामाजिक हित की समस्त जानकारी उपलब्ध है

 

6 thoughts on “बर्मन कौन सी जाति में आते हैं? जानिए अपनी असली पहचान और अधिकार”

  1. हम भी बर्मन समाज में आते हैं हिंदू धर्म में आते हैं राम जी भी हमारे मित्र हैं जय श्री राम

    Reply
  2. जैसा कि आपके बर्मन ढीमर ये सभी एक ही जाती के है
    सरकारी दस्तावेज में इनका उल्लेख कहा है कृपया बताइए ?

    Reply
    • माननीय महोदय जी इस लेख में हमने अखबार डाला है जो प्रमाण है दस्तावेज है बर्मन सरनेम जिनका है उनका जाति प्रमाण पत्र ढीमर है और जाति प्रमाण पत्र सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाया जा सकता किसी भी व्यक्ति विशेष का।

      Reply

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