
रंगों में वो शक्ति होती है जो बिना बोले ही समाज को बड़ा संदेश दे जाती हैं श्री गोविंद परोपकार सेवा समिति ग्वालियर के तत्व दान में नारायण विहार कॉलोनी में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला यहां नन्हे नन्हे चित्रकारों ने अपनी कला के माध्यम से केवल कागज नहीं रंगे बल्कि समाज की सोई हुई चेतना को जगाने का प्रयास किया गया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर महाराणा प्रताप मंडल के अध्यक्ष आशीष श्रीवास उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अध्यक्षता समिति की अध्यक्ष कोमल बाथम ने की कोमल बाथम ने कहा कला अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा सशक्त माध्यम है जब बच्चे पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर चित्र बनाते हैं तो वह भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं।
कैनवास पर उतरी भविष्य की बेटियां- श्री गोविंद परोपकार सेवा समिति द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में सबसे भावुक और प्रेरणादायक हिस्सा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय रहा। बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से समाज की बंद आंखों को खोलने का प्रयास किया किसी चित्र में बेटी को पंख लगाकर उड़ते हुए दिखाया गया तो किसी ने किताबों के साथ मुस्कुराती हुई सशक्त बेटी का चेहरा बनाया।

रंगों में झलकता हरा भरा भविष्य- सफेद कागज पर जब बच्चों ने हरे रंगों को अकेला तो लगा मानव सुख की धरती पर हरियाली लौट आई हो पेड़ है तो हम हैं चित्र स्लोगन के साथ बच्चों ने पेड़ों को धरती के फेफड़े बताते हुए उन्हें काटने से बचने का संदेश अपने चित्रकला के माध्यम से दिया। जल ही जीवन है चित्र स्लोगन द्वारा गिरते भूजल स्तर और पानी की बर्बादी को रोक कर जल संचय करने की आवश्यकता पर बोल दिया गया । प्रदूषण मुक्त संसार धुआ उगलती चिमनियों की वजाय सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों को अपनी कला में जगह दी।

पुरस्कार का नहीं यह संकल्प का सम्मान है- समिति द्वारा प्रत्येक प्रतिभागी को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया यह केवल एक प्रतियोगिता का समापन नहीं था बल्कि उन विचारों का सम्मान था जो इन बच्चों के मन में बेटियों के प्रति सम्मान पैदा कर रहे हैं ट्रॉफी लेते समय बच्चों के चेहरे का आत्मविश्वास यह बयान कर रहा था कि वह बड़े होकर ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जहां वेटियो को समान अवसर और सम्मान मिलेगा । पर्यावरण संरक्षण चित्रकला प्रतियोगिता की खास बात यह रही की यहां कोई हार नहीं बल्कि हर बच्चा विजेता बनकर उभरा श्री गोविंद परोपकार सेवा समिति ने सभी बच्चों को ट्रॉफी प्रदान की यह ट्रॉफी केवल धातु का प्रतीक नहीं थी बल्कि यह बच्चों को पर्यावरण का रक्षक नियुक्त करने का एक प्रभावशाली माध्यम बनी समिति का मानना है कि जो बच्चा आज पर्यावरण का महत्व समझ कर चित्र बना रहा है वही कर्म बड़ा होकर वृक्षारोपण और प्रगति की रक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष बालकिशन बाथम, सुनीता जी, डॉक्टर अमर सिंह राजपूत, नीरज भदौरिया, आशु मांझी, किरन कुशवाह जी,निशा पाल, हेमंत मांझी सचिन मेहरा, आदि लोग उपस्थित रहे।
नोट -आपको हमारा यह लेख कैसा लगा कमेंट करके जरूर बतायें यदि आपको हमारा यह लेख अच्छा लगा हो तो लाइक शेयर करना ना भूले समाज कार्य से जुड़ी सभी अपडेट्स पाने के लिए बने रहिए आपके अपने न्यूज पोर्टल प्रभात की कलम से। जहां आपको मिलती है समाज कार्य से जुड़ी सभी अपडेट्स सबसे तेज। यदि आप हमें किसी प्रकार का सुझाव देना चाहते हैं या फिर आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं तो आप हमें ईमेल prabhatkikalam@gmail.com पर भेज सकते हैं।
Prabhat umang धीवर समुदाय के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लेखक हैं उन्हें लेखन का एक लंबा अनुभव है प्रभात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दैनिक स्वदेश , दैनिक स्वदेश ज्योति और नव स्वदेश समाचार पत्र में सहायक लेखक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं प्रभात उमंग एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं उन्होंने धीवर समुदाय के समाज हित में सेवा कार्य किया है समाज कार्य के क्षेत्र का उन्हें एक अच्छा अनुभव है prabhat umang एक शोधकर्ता भी है
बहुत ही सुंदर और सराहनीय कार्य 👌🏻👌🏻
🙏🚩🙏🚩