राष्ट्रीय अभिलेखागार का पत्र क्रमांक 190: जबलपुर 1949 अधिवेशन और मांझी-धीवर समाज के आरक्षण का ऐतिहासिक सच

Rashtriy abhilekhagar ka Patra kramank 190 Jabalpur 1949 adhiveshan aur Majhi dhimar ke Aarakshan ka aitihasik sach
भारतीय इतिहास के अभिलेखागार national archives New Delhi मैं संरक्षित पत्र क्रमांक 190 (दिनांक 6 /12 /1949) एक ऐसा जीवंत प्रमाण है जो मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर को सामाजिक न्याय के आंदोलन के केंद्र के रूप में स्थापित करता है यह पत्र अखिल भारतीय धीवर महासभा के उस ऐतिहासिक दो दिवसीय अधिवेशन (5-6 जून 1949 )की गूंज है जिसने स्वाधीन भारत में सबसे पहले अपने अधिकारों की हुंकार भरी थी।
सामाजिक एकीकरण का दस्तावेजी प्रमाण (प्रस्ताव क्रमांक 2)- इस अधिवेशन का सबसे क्रांतिकारी पक्ष इसका प्रस्ताव क्रमांक दो अंग्रेजी में लिखे इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ढीमर( धीवर) ,कहार,केवट ,निषाद आदि के साथ माझी शब्द को अनिवार्य रूप से समाहित किया गया था यह इस बात की पुष्टि करता है की मां की कोई अलग पृथक जाति न होकर धीवर और निषाद समूह का ही एक अभिन्न अंग है। केंद्र सरकार के माध्यम से भेजा गया यह प्रस्ताव आज भी कानूनी और प्रशासनिक बसों में एक निर्विवाद साक्ष्य (Irrefutable Evidence) की तरह है।

जबलपुर :मछुआरा आंदोलन की जन्मस्थली-
प्राय माना जाता है कि आरक्षण की मांगे बाद के दशकों में तेज हुई लेकिन यह दस्तावेज सिद्ध करता है कि अखिल भारतीय ढीमर महासभा का गठन और उसका प्रथम सशक्त प्रभाव जबलपुर में ही निर्मित हुआ था संविधान लागू होने ( 26 जनवरी 1950)से पूर्व ही इस महासभा ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए आरक्षण की मांग केंद्र तक पहुंचा दी थी। अखिल भारतीय ढीमर महासभा मध्य प्रदेश का गठन परसराम ढीमर द्वारा किया गया था संस्कारधानी जबलपुर की धरती से आरक्षण की मांग मध्य प्रदेश में पहली बार उठी थी परसराम ढीमर ने अपने साथियों के साथ मिलकर तत्कालीन विधि विशेषज्ञ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से मुलाकात की थी और आरक्षण की मांग की थी। परसराम ढीमर के बारे में इंदौर के उमाशंकर रैकवार 78 वर्ष द्वारा जानकारी दी गई है।
पत्र की तकनीकी एवं विधिक प्रासंगिकता – यह पत्र केवल कागज का टुकड़ा नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक डिग्री के समान है यह प्रस्ताव प्रांत सरकार (provincial governments)के माध्यम से केंद्र को भेजा गया था जो इसकी आधिकारिक प्रमाणिकता को दर्शाता है यह स्पष्ट करता है कि मध्य प्रदेश के समुदाय अपनी पहचान और मांझी के रूप में अपने संवैधानिक हक के प्रति वर्ष 1949 से ही सजग थे ।

एक न्याय संगत विरासत- जबलपुर का वह जून 1949 का अधिवेशन आज के संघर्षरत समुदायों के लिए प्रेरणा पुंज है यह पत्र सिद्ध करता है कि माझी शब्द का समावेश और आरक्षण की मांग कोई आधुनिक राजनीति नहीं बल्कि 75 साल पुराना एक न्याय संगत संकल्प है इतिहास गवाह है कि जब-जब सामाजिक न्याय की गाथा लिखी जाएगी राष्ट्रीय अभिलेखागार की फाइल में दर्ज पत्र क्रमांक 190 और जबलपुर की धरती का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा।
तथ्यों के अन्वेषक वरिष्ठ पत्रकार अमर नोरिया का महती योगदान –इतिहास स्वयं नहीं बोलना उसे प्रमाणिक दस्तावेजों के माध्यम से बुलवाना पड़ता है किसी भी ऐतिहासिक दस्तावेज की खोज के पीछे किसी व्यक्ति का धैर्य और मेहनत होती है और सीनियर पत्रकार अमर नोरिया जी का यह प्रयास उसे गुमनाम इतिहास को पुनर्जीवित करने जैसा है राष्ट्रीय अभिलेखागार ( New Delhi )की धूल खाती फाइलों में दबे पत्र क्रमांक 190 (दिनांक 6 /12 /1949) को खोज निकालने का श्रेय वारिष्ठ पत्रकार अमर नोरिया को जाता है अमर नोरिया जी के खोजी पत्रकारिता के इस जुनून ने न केवल एक छुपा हुआ दस्तावेज समाज के सामने रखा बल्कि मन की और मछुआरा समुदाय की आरक्षण संघर्ष को एक ठोस विधिक आधार भी प्रदान किया है।

पत्रकारिता का आदर्श- एक पत्रकार के रूप में नोरिया जी का यह कार्य केवल समाचार देना नहीं बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग के अस्तित्व और उसकी पहचान की लड़ाई को ऐतिहासिक साक्ष्यों लैस करना है अमर नोरिया जी द्वारा प्रस्तुत यह दस्तावेज शोधकर्ताओं ,समाजशास्त्रियों और नीति निर्माताओ के लिए अनिवार्य संदर्भ बिंदु (Reference Point) बन चुका है।
राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार अमर नोरिया द्वारा निकलवाया गया पत्र क्रमांक 190 दिनांक 6.12.1949 यह पत्र अंग्रेजी में हैं इसलिए हमने हिंदी में से ट्रांसलेट किया है पत्र को आप पढ़े-
लॉटरी नंबर: 190
6-12-49 को
प्राइमर, हैदराबाद प्रांत, सिकंदराबाद। 15
विषय: अंतर प्रांतीय धी हिवार सम्मेलन दिनांक 5 और 6 जून 1949 के संकल्प की अनुशंसा।
सन्दर्भ: हमारा पत्र क्रमांक.
डी/30.6.49.
मैं “धीवर समाज” की ओर से आपके विचार और उचित कार्रवाई के लिए निम्नलिखित निवेदन करता हूं।
एनडीआईए
धीवर समाज और उस समुदाय के अन्य लोग जिन्हें आज अलग-अलग नामों से जाना जाता है, भारत में लगभग 5 करोड़ लोग हैं। आर्थिक और व्यापारिक दोनों ही स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी समुदाय ने कोई आशातीत प्रगति नहीं दिखाई है। उपरोक्त कारणों से धीवर समाज ने 5 और 6 जून 1949 को जबलपुर में आयोजित अपने अंतर प्रांतीय धीवर सम्मेलन में इस समुदाय के उत्थान के लिए सरकार को कुछ सिफारिशें भेजीं और प्रांतीय सरकारों से इसकी स्थिति में सुधार करने की अपील की इस समुदाय के लोग.लेकिन हमारी बड़ी दुर्दशा के लिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जब संविधान सभा ने मुझसे मुलाकात की तो मुझे उम्मीद थी कि यह निकाय इस सामुदायिक समुदाय की स्थिति में सुधार लाने के लिए कुछ आशावादी प्रयास कर सकता है। लेकिन हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि संविधान सभा ने धारा 292 (के) (ख) भाग 14 के तहत अल्पसंख्यकों के लिए कोई आरक्षित सीटें नहीं रखीं और धारा 303 (बी) के तहत इस समुदाय को अनुसूचित जाति या अलग प्रांतों के पिछड़े वर्गों में शामिल कर दिया। परिणाम यह हुआ कि पूरा समुदाय विभाजित हो गया। यह स्पष्ट है कि पूरी संविधान सभा ने 1936 के अधिनियम से सूची की नकल की है। धीवर समाज के लोग उन्हें विभाजित करने के इस निर्णय को किसी भी स्थिति में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
12.10.49 को इस समाज के आधे लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल माननीय डॉ. अम्बेडकर से मिला और उनके मामले का प्रतिनिधित्व किया, मंत्री संतुष्ट हुए और कानून के बारे में पूछा और प्रतिनिधिमंडल से कहा कि इसे प्रांतीय सरकार के माध्यम से अग्रेषित किया जाए, जिसकी सिफारिश पर इस मामले में उपरोक्त निर्णय लिया जा सकता है।
इसलिए मैं इस समाज की ओर से प्रांतीय सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह 30.6.49 को आपके सम्मान में भेजी गई अंतर प्रांतीय धीवर सम्मेलन की सिफारिशों को शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करे (तत्काल संदर्भ के लिए प्रति संलग्न है)।
मुझे आशा है कि मुझे यकीन है कि प्रांतीय सरकार। भारत को प्रभावित करने वाले और पांच लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले इच् में अपने नागरिकों पर तत्काल विचार किया जाएगा और अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजी जाएंगी।
भवदीय, मुंशी प्री
सचिव अखिल भारतीय धीवर महासभा, जुबुलपुर।
एसडी/-161
अंतर प्रांतीय धीवर समलान की अध्यक्षता 16 मेसरा ने की। धीरजलालजी बरमैयां और श्री नरदेवसिंहजी एम.ए.कानपुर, क्रमशः 5 और 6 जून 1949 को। इस सामुदायिक सम्मेलन में विभिन्न प्रांतों के उत्साही कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, उनकी मांगें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक थीं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनाई गई विधि महात्मा गांधी के सत्य अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित थी।
सर्वसम्मति से पारित चार प्रस्ताव निम्नलिखित हैं:-
भारत एफ
1. संकल्प लिया गया कि केंद्र और प्रांतीय सरकार को धीवर समुदाय की जनसंख्या के आधार पर विधान सभा और स्थानीय निकायों में संविधान सभा में सीटें आरक्षित करनी चाहिए।
2. संकल्प लिया कि सरकार को थिवर मल्लाह केवट कैबर्ट जालिया कोली मांझी भोई पथि वाहक निया हद और ऐसे अन्य लोगों को एक समुदाय के रूप में मान्यता देनी चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। कोली कहार
3. निर्णय लिया गया कि सरकार को विशेष रूप से तालाबों, नदियों और उनकी घाटियों में लोगों द्वारा उत्पादित मछली पालन, नौसेना और जलीय खेती में शिक्षा और रोजगार के संबंध में सभी सुविधाएं देनी चाहिए।
अधिभोग राइट के रूप में समुदाय का। 4. अनुरोध है कि सरकार को मत्स्य पालन विभाग में व्यक्तियों को लेकर इस समुदाय की मदद करनी चाहिए और इन जातियों के लोगों को निराश करने का एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
संकल्प लिया कि यह सम्मेलन परिचय, परिचय द्वारा इकाई को मजबूत करने की अनुशंसा करता है। अंतरप्रांतीय उपजाति और विभिन्न गोत्रों में बिना किसी हिचकिचाहट के रंग-रूप के साथ विवाह और
6. निर्णय लिया गया कि यह सम्मलेन रिपोर्ट के अनुसार मजबूत आधार और अन्य के लिए पूरे भारत में ‘SAHPHOJ प्रणाली’ शुरू करने की सिफारिश करता है।
टियोनए
मुंशी प्रीतमलाल बरमैयां
सचिव अखिल भारतीय धीवर मन सभा
गांधीगंज, सब्जी मंडी जुबुलपुर।
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लेखक परिचय – प्रभात ढीमर एक प्रोफेशनल लेखक, फिल्म रिसर्चर और लॉ स्टूडेंट हैं। वे पिछले 5 वर्षों से मनोरंजन जगत और सामाजिक विषयों पर धारदार लेख लिख रहे हैं। उन्हें सिनेमाई इतिहास के दस्तावेजीकरण और डिजिटल मार्केटिंग में विशेषज्ञता हासिल है।” उन्होंने सलमान खान फिल्म्स, यशराज फिल्म्स बॉलीवुड यात्रा पर विशेष लेख लिखे हैं , बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन,मोहन फाउंडेशन के समाज कार्य पर विशेष लेख भी लिखे हैं दैनिक स्वदेश और स्वदेशी ज्योति अखबार में पिछले 10 वर्षों से सहायक लेखक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
नोट – आपको हमारा यह लेख कितना उपयोगी लगा कमेंट करके जरूर बताएं यदि आपको हमारा यह लेख अच्छा लगा हो तो लाइक शेयर करना ना भूले मध्य प्रदेश माझी निषाद समाज की सभी खबरों के लिए बने रहिए आपके अपने न्यूज पोर्टल प्रभात की कलम पर। यदि आप हमें किसी प्रकार का सुझाव देना चाहते हैं या फिर आप हमसे संपर्क करना चाहते हैं तो आप हमें ईमेल prabhatkikalam@gmail.com पर भेज सकते हैं आप नीचे दिए गए आइकन पर क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम ग्रुप से भी जुड़ सकते हैं।
Prabhat umang निषादवंश के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लेखक हैं उन्हें लेखन का एक लंबा अनुभव है वह एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं उन्होंने निषादवंश के समाज हित में सेवा कार्य किया है समाज कार्य के क्षेत्र का उन्हें एक अच्छा अनुभव है prabhat umang एक शोधकर्ता भी है